नई दिल्ली: दक्षिण राजस्थान की नाता प्रथा के कड़वे सच को पर्दे पर उतारने वाली राजस्थानी फिल्म ‘नाते’ STAGE पर दर्शकों के दिलों को झकझोर रही है। निर्देशक श्याम उपाध्याय की यह फिल्म एक माँ और बेटी की कहानी है, माँ, जिसे एक परंपरा के नाम पर नाते में भेज दिया जाता है, और बेटी, जो अपनी माँ को अपने पास रखने के लिए अपने सपने छोड़कर बाल विवाह के लिए हाँ कह देती है।
आकांक्षा पाल, रशिका प्रधान, जयहिंद कुमार, शशि रंजन और दीपक बंधु फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में हैं। यूट्यूब पर फिल्म की समीक्षा करने वाले कई क्रिएटर्स ने इसे हाल के बरसों की सबसे विचलित कर देने वाली फिल्मों में गिना है। इसलिए नहीं कि यह डराती है, बल्कि इसलिए कि यह सच दिखाती है।
नाता: एक रिश्ता, जो सौदा बन गया
राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ इलाक़ों में सदियों से चली आ रही नाता प्रथा कभी विधवाओं और परित्यक्ता औरतों को दोबारा घर बसाने का रास्ता मानी जाती थी। लेकिन समय के साथ यही प्रथा कई जगह औरत के लेन-देन का ज़रिया बन गई — जहाँ एक औरत को पैसों के बदले एक घर से दूसरे घर ‘नाते’ में भेज दिया जाता है, और उसकी मर्ज़ी किसी हिसाब में नहीं गिनी जाती।
‘नाते’ इसी सच की कहानी है। लेकिन यह किसी अख़बार की रिपोर्ट या किसी सरकारी आंकड़े की तरह नहीं, बल्कि एक माँ और बेटी के आँसुओं के ज़रिए कही गई है।
जीव्वी और पिंकी: एक माँ, एक बेटी, दो ज़ंजीरें
फिल्म की नायिका है जीव्वी — दक्षिण राजस्थान के एक गाँव की औरत, जिसे नाते में भेज दिया जाता है। एक घर से दूसरे घर, एक आदमी से दूसरे आदमी तक धकेली गई जीव्वी के लिए ज़िंदगी अब सिर्फ़ ज़िंदा रहने की लड़ाई है।
और फिर है उसकी बेटी पिंकी। पिंकी के अपने सपने हैं, अपनी उम्र है, अपनी किताबें हैं। लेकिन जब उसे पता चलता है कि माँ को अपने पास रखने का एक ही रास्ता है, तो वह वह फ़ैसला करती है, जो किसी बच्ची को कभी नहीं करना चाहिए। वह अपने सपने छोड़कर बाल विवाह के लिए हाँ कह देती है।
एक परंपरा माँ को छीनती है, दूसरी बेटी का बचपन। ‘नाते’ इन दोनों ज़ंजीरों के बीच फँसी उस मोहब्बत की कहानी है, जो माँ और बेटी के बीच है — और जो इस फिल्म का सबसे दर्दनाक, सबसे ख़ूबसूरत सच है।
श्याम उपाध्याय: जिन्होंने चौपाल की चुप्पी तोड़ी
निर्देशक श्याम उपाध्याय ने ‘नाते’ के ज़रिए उस विषय को छुआ है, जिस पर गाँवों में अक्सर दबी ज़ुबान में बात होती है और शहरों में शायद ही कोई जानता है। उन्होंने कहानी को किसी बाहरी नज़र से नहीं, उसी ज़मीन की बोली और उसी मिट्टी के चेहरों के साथ कहा है।
करीब डेढ़ घंटे की यह फिल्म कहीं भाषण नहीं देती। वह बस दिखाती है — और दर्शक को अपने सवालों के साथ अकेला छोड़ देती है।
चेहरे, जो कहानी को सच बनाते हैं
आकांक्षा पाल, रशिका प्रधान, जयहिंद कुमार, शशि रंजन और दीपक बंधु ने फिल्म के किरदारों को जिस सहजता से जिया है, वह ‘नाते’ को एक फिल्म से ज़्यादा, एक गवाही बना देता है। माँ और बेटी के रिश्ते की नर्मी और उस पर पड़ती परंपरा की मार। दोनों को इन कलाकारों ने बिना किसी शोर के पर्दे पर उतारा है।
अपनी बोली में, अपने लोगों के बीच
‘नाते’ जैसी फिल्मों की सबसे बड़ी ताक़त यह है कि वे उसी बोली में बनी हैं, जिसमें यह प्रथा जी जाती है। STAGE पर राजस्थानी में मौजूद यह फिल्म अब सीधे उन घरों तक पहुँच रही है, जहाँ यह सवाल सबसे ज़्यादा मायने रखता है।
शायद कोई माँ इसे देखकर अपनी बेटी का हाथ थोड़ा और मज़बूती से थामे। शायद कोई पिता किसी फ़ैसले से पहले एक बार रुककर सोचे। एक फिल्म इतना ही कर सकती है — और ‘नाते’ यह कर रही है।
“यह परंपरा की नहीं, एक माँ और बेटी के प्यार की कहानी है”
फिल्म के निर्देशक श्याम उपाध्याय ने कहा,
‘नाते’ परंपरा की नहीं, एक माँ और बेटी के प्यार की कहानी है। नाता प्रथा के बारे में गाँवों में सब जानते हैं, पर कोई बोलता नहीं। मैं चाहता था कि यह चुप्पी टूटे, और वह भी उसी बोली में, जिसमें यह दर्द जिया जाता है। STAGE ने इस फिल्म को उन्हीं लोगों तक पहुँचाया है, जिनके लिए यह बनी है।
STAGE के सह-संस्थापक और CCO प्रवीण सिंघल ने कहा,
बोलियों का सिनेमा तभी पूरा होता है, जब वह अपने समाज से ईमानदार सवाल पूछे। ‘नाते’ यही करती है। हमें गर्व है कि STAGE ऐसी कहानियों का घर है, जो दर्शक को सिर्फ़ रुलाती नहीं, सोचने पर भी मजबूर करती हैं।
STAGE के बारे में
STAGE भारत का पहला ‘बोली-फर्स्ट’ OTT प्लेटफॉर्म है, जिसकी शुरुआत 1 नवंबर 2019 को विनय सिंघल, प्रवीण सिंघल और शशांक वैष्णव ने की। नोएडा स्थित यह प्लेटफॉर्म हरियाणवी, राजस्थानी, भोजपुरी, गुजराती, मराठी, बांग्ला, पंजाबी और हिंदी में फिल्में, वेब सीरीज़, माइक्रोड्रामा, एनीमे और डॉक्यूमेंट्री उपलब्ध कराता है। इसकी लाइब्रेरी में 5,000 से ज़्यादा फिल्में और सीरीज़ हैं। ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा और अभिनेता रणदीप हुड्डा STAGE के ब्रांड एम्बेसडर हैं। कंपनी नहीं, हम क्रांति हैं। अधिक जानकारी: www.stage.in